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पश्चिम बंगाल में फिर शुरू हुआ राजीतिक प्रतिशोध का दौर ?

अभिषेक बनर्जी पर हुआ हमला क्या कहता है ?

समय के बदलते ही क्या कुछ बदल जाता है। इसकी एक तस्वीर शनिवार को पश्चिम बंगाल से आई। वो अभिषेक बनर्जी..जिनके आगे पश्चिम बंगाल में किसी दूसरे की धमक नहीं थी...जिनकी तूती बोलती थी। उन्हीं अभिषेक बनर्जी पर भीड़ ने हमला कर दिया। जी हां..पूर्व सीएम और टीएमसी

अध्यक्ष ममता बनर्जी या ममता बंदोपाध्याय के भतीजे अभिषेक। डायमंड हार्बर से मौजूदा लोकसभा सांसद अभिषेक । उन पर भीड़ ने  अंडे फेंके, कपड़े फाड़ डाले,चोर-चोर के नार लगाए..मारपीट की। 


ये वारदात कोलकाता से तकरीबन 20-21 किलोमीटर दूर  सोनारपुर इलाके में हुई थी। यहां अभिषेक चुनाव बाद की हिंसा के प्रभावित अपने कार्यकर्ताओँ का मनोबल बढाने गए थे। लेकिन उन्हीं पर हमला हो गया। टीएमसी का दावा है कि पत्थर भी फेंके गए। 

उनके साथ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने अभिषेक को भीड़ के चंगुल से समय पर सुरक्षित निकाल लिया। 

लेकिन इससे पहले जो कुछ भी हुआ..वो ये बताने 

को काफी था कि पश्चिम बंगाल में समय बदलते ही टीएमसी और उसके नेताओं को कौन से दिन

देखने पड़ रहे। देखिए कानून व्यवस्था के मामले में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। अभिषेक 

विपक्षी दल के बड़े नेता हैं..तो जाहिर है उनकी सुरक्षा भी सख्त होनी चाहिए..लेकिन पब्लिक का ये 

रुख भी हैरान करता है। अभिषेक बनर्जी इसे बीजेपी की तरफ से प्रायोजित हमला बता रहे। तो बीजेपी कह रही है कि जनता के बीच अभिषेक को लेकर आक्रोश है..गुस्सा है..इसी वजह से ऐसा हुआ। अभिषेक का आरोप है कि पुलिस के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। अब इसका सच जो भी हो..लेकिन जो हुआ..उसे सुनकर देखकर आप भी  चौंक ही रहे होंगे। यही अभिषेक बनर्जी थे..तो सीधे गृहमंत्री अमित शाह तक को चेतावनी दिया करते थे..लेकिन अब वो वक्त है कि उन्हें सुरक्षा बल के लोग भीड़ से बचाने के लिए हेलमेट पहनाते नजर आए। अंडे की बौछार का मतलब किसी भी व्यक्ति का अपमान करने से भी जुड़ा है। मारपीट और चोर-चोर के नारे तो और भी ज्यादा अपमान और नुकसान पहुंचाने की कोशिश जैसा दिखता है। ये वही अभिषेक बनर्जी हैं..

जिनके आगे पुलिस के बड़े बड़े अधिकारी हमेशा आदेश बजाने के मूड में दिखते थे। लेकिन अब उन्हें  अपनी सुरक्षा के लिए ही हलकान होना पड़ रहा। उधर ममता बनर्जी ने इस घटना के बाद बीजेपी पर बडे आरोप लगाए हैं..तीखी निंदा करते हुए उन्होंनेलिखा कि "शासक ही हत्यारे बन गए हैं. बीजेपी पर शर्म आती है." ...तो ममता बनर्जी की भाषा बहुत तल्ख है। शुभेंदु सरकार को वो हत्यारे बता रही है। तो समझा जा सकता है कि गुस्सा किस स्तर का है। 

लेकिन बीजेपी इसे जनता का आक्रोश बता रही है.तो ये भी समझ सकते हैं कि यहां बीजेपी और टीएमसी के बीच की राजनीतिक दुश्मनी का लेवल क्या है। कोलकाता के प्रसिद्ध अखबार टेलिग्राफ का तो ये भी दावा है कि अभिषेक बनर्जी पर जूते भी फेंके गए। देखिए अभिषेक बनर्जी टीएमसी के महासचिव हैं. मतलब पार्टी के बड़े नेता। राष्ट्रीय महासचिव...यानी देश भर में संगठन की जिम्मेदारी है। इसी नाते वे  

चुनाव के 25 दिन बाद..जनता के बीच गए थे। जहां हमला हुआ.वो सोनारपुर इलाका साउथ चौबीस परगना में आता है। यहां वे चुनावी हिंसा के शिकार एक टीएमसी समर्थक के घर गए थे...

लेकिन लौटते वक्त उन पर ही हमला हो गया। बीजेपी के कई नेताओं ने इस वारदात के बाद लोगों से अपील की है कि कानून हाथ में ना लें। बीजेपी कह रही है कि हमें पश्चिम बंगाल को राजनीतिक हिंसा से मुक्त कराने की

जरूरत है। अब देखिए ये कब तक होता है..फिलहाल जो हुआ है वो ये बताने को काफी है कि पश्चिम बंगाल की फिजा बिल्कुल अलग है। लेकिन राजनीतिक हिंसा को किसी भी तरह से ठीक नहीं ठहराया जा सकता। बीजेपी का वादा है कि वो राज्य को राजनीतिक हिंसा से मुक्त करेगी। अब देखना है कि ये तस्वीर कब तक बदलती है..क्योंकि अभिषेक बनर्जी पर हमला कुछ वैसा ही है..जैसे आरोप ममता सरकार के दौरान 

बीजेपी के कई नेताओं ने लगाए थे। जो अलग-अलग समय पर सियासी हिंसा और ऐसे हमलों की

जद में आए थे। 



कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, शिवसेना यूबीटी, आरजेडी सहित कई दलों ने इस हमले की निंदा की है


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